स्मिता और राकेश का अपने नए फ्लैट में पहला दिन था. दोनों खुश थे कि आखिरकार उन्होंने अपने सपनों का घर खरीद लिया. दिनभर की साफ-सफाई और सामान लगाने के बाद दोनों थककर चूर हो चुके थे और कब उनकी आंख लग गई पता ही नहीं चला..दोनों फर्श पर ही एक चटाई पर सो गए...तभी रात 10 बजे उनके फ्लैट की बेल बजती है. बेल की आवाज सुनकर स्मिता राकेश को जगाती है और कहती है- इतनी रात को कौन हो सकता है...हम तो यहां किसी को जानते भी नहीं...ठहरो मैं देखता हूं...
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